लालकुआं। नगर पंचायत अध्यक्ष पद के चुनावों में बीजेपी विधायक नवीन दुम्का और पूर्व काबीना मंत्री हरीश चंद्र दुर्गापाल की प्रतिष्ठा दांव पर, पढ़ें उत्तरांचल न्यूज़ नेटवर्क की विशेष खबर

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लालकुआं नगर पंचायत चुनाव महासमर

कौन बनेगा चेयरमैन ?

लालकुआं। किसकी होगी जीत और कौन बनेगा लालकुआं का चेयरमैन यह तो आने वाली 20 तारीख को तय हो जाएगा मगर सत्तारूढ़ भाजपा विधायक नवीन दुम्का और पूर्व कैबिनेट मंत्री हरीश चंद्र दुर्गापाल की प्रतिष्ठा दांव पर लगी हुई है। भाजपा की ओर से अरुण प्रकाश बाल्मीकि चुनावी रण में है तो वहीं कांग्रेस से लालचंद सिंह अपनी चुनावी ताल ठोक चुके हैं। हालांकि दोनों उम्मीदवार स्थानीय मुद्दों को लेकर चुनावी मैदान में जनता से आशीर्वाद मांग रहे हैं तो वहीं सत्तारूढ़ पार्टी के विधायक नवीन दुम्का क्षेत्र के ज्वलंत समस्याओं से निजात दिलाने की बात कहकर भाजपा प्रत्याशी अरुण प्रकाश के पक्ष में वोट करने की अपील कर रहे हैं इधर पूर्व काबीना मंत्री रहे हरीश चंद्र दुर्गापाल अब तक अपने कार्यकाल में किए गए विकास कार्यों को गिना कर कांग्रेस उम्मीदवार लालचंद को जिताने के लिए प्रतिबद्ध दिख रहे हैं। वर्तमान हालात पर गौर करें तो लालकुआं नगर पंचायत अध्यक्ष पद पर मुकाबला बेहद रोमांचकारी होने जा रहा है। शक्ति प्रदर्शन में दोनों ही पार्टियों के प्रत्याशियों ने अपने अपने वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में विशाल जुलूस निकालकर अपनी ताकत का एहसास कराया। यह चुनाव भले ही नगर पंचायत का हो मगर विधानसभा स्तर के दोनों नेताओं की प्रतिष्ठा दांव पर लगी हुई है। प्रत्याशियों के अलावा दोनों विधानसभा स्तर के नेता अपने-अपने प्रत्याशियों के लिए लोकलुभावन बातों के साथ-साथ विकास कार्यों का हवाला देकर वोट मांग रहे हैं। बीजेपी प्रत्याशी के लिए जहां एक ओर प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट लालकुआं पहुंचकर केंद्र एवं राज्य सरकार की उपलब्धियां गिना कर भाजपा के पक्ष में वोट करने की अपील कर चुके हैं तो वहीं कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष प्रतीम सिंह भी लालकुआं पहुंचकर रोड शो के माध्यम से कांग्रेस पार्टी की तत्कालीन कांग्रेस सरकार में की गई उपलब्धियों को गिना कर कांग्रेस के पक्ष में वोट करने की अपील कर चुके हैं इसके अलावा प्रदेश प्रभारी अनुग्रह नारायण सिंह भी कांग्रेस पार्टी को मजबूती प्रदान करने के लिए लालकुआं का दौरा कर चुके हैं। ऐसे में लालकुआं की जनता किसे ताज पहनाकर चेयरमैन की कुर्सी तक पहुंचाती है यह आने वाली 20 तारीख को साफ हो जाएगा मगर सवाल यह है कि तमाम लोकलुभावन वादों के साथ जनता को उनके ज्वलंत समस्याओं से निजात मिलेगी या नहीं या फिर चुनाव जीतने के बाद हर बार की तरह इस बार भी यह ज्वलंत समस्याएं सिर्फ मुद्दा बनकर एक ठंडे बस्ते में चली जाएंगी और फिर इन ज्वलन्त समस्याओं का जिन्न आगामी विधानसभा लोकसभा या निकाय चुनाव में फिर से बाहर आएगा और फिर इन्ही दावों और वादों के साथ जनता को महज झुनझुना थमाने के अलावा और कुछ हाथ नहीं लगेगा इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता।

*लालकुआं की ज्वलन्त समस्याएं।*

लालकुआं की ज्वलंत समस्याओं पर गौर करें तो यहां के वासियों को आज तक उनकी भूमि का मालिकाना हक नहीं मिल पाया है मगर यह मुद्दा हर चुनावों में बोतल में रखे जिन्न की तरह बाहर आता है और चुनाव बीतते ही वापस चला जाता है जो कांग्रेस और बीजेपी सरकार की सबसे बड़ी नाकामी है इसके अलावा चाहे खेल का मैदान हो ट्रांसपोर्ट नगर हो, पार्किंग की व्यवस्था हो, बाईपास का निर्माण कर फोर लेन प्रोजेक्ट से लालकुआं शहर को बचाना हो, हिंदुओं के शव दाह के लिए स्थाई श्मशान घाट का निर्माण हो, बच्चों के खेलने के लिए पार्क हो या फिर रोडवेज बस अड्डे के निर्माण की बात हो फिलहाल इन सब सुविधाओं से आज भी लालकुआं शहर अछूता है ऐसा नहीं है कि निकाय चुनावों में या फिर किसी अन्य चुनावों में या मुद्दे गरमाते नहीं हो मगर चुनाव बीत जाने के बाद यह सभी ज्वलनशील के मुद्दे ठंडे बस्ते में चले जाते हैं और किसी भी प्रकार के चुनाव आने पर इन को फिर से मुद्दा बनाकर जनता की जन भावनाओं से खिलवाड़ किया जाता है इस बार भी ऐसा ही कुछ हो रहा है फिलहाल देखना यह होगा कि क्या जनता इन ज्वलनशील मुद्दों से निजात पाती है और चेयरमैन की कुर्सी पर बैठने वाला व्यक्ति क्या जन भावनाओं के अनुरूप इन सब मुद्दों का निस्तारण कर लालकुआं नगर पंचायत को एक नगर आदर्श नगर पंचायत के रूप में स्थापित कर पाता है या नहीं।

लालचंद्र सिंह कांग्रेस प्रत्याशी

 

अरुण प्रकाश बाल्मीकि बीजेपी प्रत्याशी

कल की स्पेशल रिपोर्ट:- निर्दलीय और बसपा उम्मीदवार बिगाड़ सकते हैं दोनों दलों के सत्ता का गणित।

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